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उपन्यास: ख़्वाब सा कुछ 【पारिवारिक प्रतिछवियों के माध्यम से समाज की नग्न सच्चाईयों से मुठभेड़ 】- रमेश शर्मा

ख़्वाब सा कुछ संजय मनहरण सिंह का हाल ही में प्रकाशित उपन्यास है। संजय कवि भी हैं और कहानियाँ भी लिखते हैं । उनके किसी भी विधा की रचनाओं में एक तरह की साम्यता यह नज़र आती है कि वे कलात्मक भाषा और स्वप्न दृष्टि से जुड़े प्रयोग को लेकर बहुत उत्सुक और सचेत नज़र आते  हैं । अभिव्यक्त होने वाली रचना से जुड़े दृश्यों को व्यक्त करने के लिए उनके पास कलात्मक भाषा की एक मौलिक शैली है जो उनकी अपनी कल्पना से जन्म लेती हुई दिखाई देती है । इससे घटनाओं का सम्प्रेषण और सघन होता है। उनकी कविताओं, कहानियों के अलावा नया प्रकाशित उपन्यास  "ख़्वाब सा कुछ" में भी उनका यह कौशल दिखाई देता है। उपन्यास की घटनाओं से जुड़े पात्रों के नामों का चयन भी कुछ इस तरह उन्होंने किया  है कि उससे पाठक के मन में एक अतिरिक्त जिज्ञासा  का भाव उत्पन्न होता है। हरिया, हरिमन , ऐंठबहार, घुमनाहा , बुतरू , जोजबोलही , बनगिहाँ, टेटमेरही सोनपियारी इत्यादि नाम वाले पात्रों से ही यह जाना जा सकता है कि उपन्यास सर्वहारा जीवन पर केन्द्रित है। किसी भी उपन्यास को लेकर यह मान्यता स्थापित है कि अगर वह जीवन के बड़े केनवास पर फैले यथार्थ...

■हिंदी, चुनौतियाँ एवं संभावनाएं बिषय पर मुख्य वक्ता रमेश शर्मा ने दिया वक्तब्य

■हिंदी दिवस पखवाड़ा अंतर्गत के.एम.टी. गर्ल्स कॉलेज में हुई संगोष्ठी ■हिंदी, चुनौतियाँ एवं संभावनाएं बिषय पर मुख्य वक्ता रमेश शर्मा ने दिया वक्तब्य   रायगढ़। हिंदी दिवस पखवाड़ा अंतर्गत आज 24 सितम्बर को के.एम.टी. शासकीय गर्ल्स कॉलेज रायगढ़ में "हिंदी, चुनौतियाँ एवं संभावनाएं" बिषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया । आमंत्रित साहित्यकार द्वय रमेश शर्मा एवं बसंत राघव के आतिथ्य एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.उमा नेगी की अध्यक्षता में कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महाविद्यालय के हिंदी प्राध्यापक राजकुमार राठौर ने हिंदी की वर्तमान स्थिति , उसकी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर बिषय प्रवेश करवाते हुए अपना प्रारम्भिक वक्तब्य प्रस्तुत किया। प्राचार्य डॉक्टर उमा नेगी ने अपना आशीर्वाद वक्तब्य देते हुए सभा को सम्बोधित कर बच्चों एवं अतिथियों का उत्साह बढ़ाया।  कार्यक्रम में आमंत्रित मुख्य वक्ता हिंदी के सुपरिचित कहानीकार  रमेश शर्मा ने हिंदी को लेकर चली आ रही धारणाओं की पड़ताल करते हुए यह कहा कि दुनिया की लगभग आठ सौ करोड़ आबादी में 61 करोड़ लोग हिंदी भाषा बोलते हैं। अंग्रेजी 152 करोड़ और मंदारिन 118 करोड़ ...

कथायात्रा के टेढ़े मेढ़े रास्ते और समकालीन कहानी की परिधि में रमेश शर्मा की उपस्थिति - वरिष्ठ कथाकार उर्मिला आचार्य का आलेख

  कथायात्रा के टेढ़े मेढ़े रास्ते और समकालीन कहानी की परिधि में रमेश शर्मा की उपस्थिति -------------------------------------------------------------------------- -----------------------------------------                                - उर्मिला आचार्य कथा कहानी के इर्द गिर्द रचनाकार की उपस्थिति किस रूप में , किस तरह और कहाँ कहाँ हो सकती है , इसका आकलन करना दिलचस्प होते हुए भी एक दुरूह कार्य है । आकलन न कहते हुए अगर इसे शोध या कोई खोज पूर्ण कार्य कहा जाए तब भी हम इसे सामान्यीकृत नहीं कर रहे होते हैं । कथा लेखन करने के लिए लेखक जिस दुनिया में उतरता है , जिन रास्तों से होकर आगे बढ़ता है , उस दुनिया तक पहुँचने के लिए उन रास्तों से होकर गुजरे बिना हम लेखक का पीछा नहीं कर सकते । यहाँ पीछा करने के अपने निहितार्थ हैं जहाँ से हम लेखक को जानने समझने के लिए उन्हीं रास्तों से होकर गुजरते हैं जहाँ से लेखक अपनी कथायात्रा के साथ आगे बढ़ता है। ...