सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

समकालीन कहानी के केंद्र में इस बार: नर्मदेश्वर की कहानी : चौथा आदमी। सारा रॉय की कहानी परिणय । विनीता परमार की कहानी : तलछट की बेटियां

यह चौथा आदमी कौन है?

■नर्मदेश्वर की कहानी : चौथा आदमी

नर्मदेश्वर की एक कहानी "चौथा आदमी" परिकथा के जनवरी-फरवरी 2020 अंक में आई थी ।आज उसे दोबारा पढ़ने का अवसर हाथ लगा। नर्मदेश्वर, शंकर और अभय के साथ के कथाकार हैं जो सन 80 के बाद की पीढ़ी के प्रतिभाशाली कथाकारों में गिने जाते हैं। दरअसल इस कहानी में यह चौथा आदमी कौन है? इस आदमी के प्रति पढ़े लिखे शहरी मध्यवर्ग के मन में किस प्रकार की धारणाएं हैं? किस प्रकार यह आदमी इस वर्ग के शोषण का शिकार जाने अनजाने होता है? किस तरह यह चौथा आदमी किसी किये गए उपकार के प्रति हृदय से कृतज्ञ होता है ? समय आने पर किस तरह यह चौथा आदमी अपनी उपयोगिता साबित करता है ? उसकी भीतरी दुनियाँ कितनी सरल और सहज होती है ? यह दुनियाँ के लिए कितना उपयोगी है ?

इन सारे सवालों को यह छोटी सी कहानी अपनी पूरी संवेदना और सम्प्रेषणीयता के साथ सामने रखती है।

कहानी बहुत छोटी है,जिसमें जंगल की यात्रा और पिकनिक का वर्णन है । इस यात्रा में तीन सहयात्री हैं, दो वरिष्ठ वकील और उनका जूनियर विनोद ।यात्रा के दौरान जंगल के भीतर चौथा आदमी कन्हैया यादव उन्हें मिलता है जो वर्मा वकील साहब को देखकर कृतज्ञ होकर अपनी खुशी जाहिर करता है। कभी किसी केस में वह जेल चला गया था और जेल से छुटकारा दिलाने में वर्मा वकील साहब का हाथ रहा। यद्यपि वर्मा वकील साहब की स्मृति में यह वाकया अब जीवित नहीं है पर अपनी जीवंत बातों और कृतज्ञ भाव से उस वाकये को यह चौथा आदमी जीवित करने की कोशिश करता है और अपनी कोशिश में वह कामयाब भी हो जाता है।

यह चौथा आदमी उन तीनों वकीलों को अपनी आपबीती सुनाते हुए कहता है कि किस तरह वह वन विभाग के कर्मियों द्वारा चराई के झूठे मामले में फंसा कर जेल भिजवा दिया गया था । उसका दोष इतना भर था कि वन रक्षक से उसकी पटती नहीं थी और उसके भाई को वार्ड चुनाव में उसने वोट नहीं दिया था। इस चक्कर में वह एक महीने जेल में रहा और फिर वर्मा वकील साहब की कृपा से जेल से उसे मुक्ति मिली।  दरअसल यह चौथा आदमी हर रोज जंगल में  अपनी भैंस चराने जाता है । उसे उस जंगल की चप्पे-चप्पे की जानकारी है । वह उस  साधु की भी सेवा में लगा है  जो घने जंगल में अकेला रहता है  और जिसे  धनी समझ कर चोरों ने उसकी दोनों आंखें फोड़ दी हैं। यह चौथा आदमी उस श्रमिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है जो सरल है,सहज है और संवेदनशील भी, इसलिए हर जगह वह शोषण का शिकार भी है।

यह चौथा आदमी कन्हैया यादव उन वकीलों की टोली को जंगल में रास्ता दिखाता है। चलते चलते वर्मा साहब के साथियों को लगने लगता  है कि यह भोजन के लिए हमारे पीछे हो लिया है। यह बहुत अधिक बातूनी है। यह किसी काम का नहीं है। ऐसी धारणा बनने के बाद जूनियर वकील विनोद को उससे चिढ़ होने लगती है कि इस आफत से कैसे पिंड छुड़ाएं । इस तरह के विचार विनोद के मन में आने लगते हैं पर किसी तरह वर्मा जी उन्हें इशारे से रोकते हैं । 

अंततः जंगल में बर्तन भाड़े की कमी के बावजूद भोजन तैयार करने में इस चौथे आदमी कन्हैया यादव की भूमिका कितनी कारगर और चमत्कारिक है , उसका जिक्र इस कहानी में आता है ।दरअसल यह कलात्मक चमत्कार उस श्रमिक को अपने जीवन से मिले आनुभविक संघर्ष की ही देन है जो उसके जीवन की पीठ पर हर वक्त लदा है। 

जंगल के भीतर बहती नदी में अचानक कैसे बाढ़ आ जाती है ,और उस बाढ़ से वह चौथा आदमी किस तरह उन सबकी रक्षा करता है, कहानी का यह प्रसंग उस श्रमिक की उपयोगिता को प्रमाणित करता है। यह श्रमिक वर्ग ही है जिसने समाज को पग-पग पर सुरक्षित रखने के लिए अपने श्रम और अनुभव का बलिदान दिया है। यह समाज को पका पकाया सब कुछ देता है ,पर उस पके पकाए पर उसका अधिकार नहीं है।

यह कहानी अंततः उस चौथे आदमी के प्रति मन की सारी गलत धारणाओं को ध्वस्त करती हुई हमारे मन में गहरी संवेदना जगाती है। कई कहानियां अपनी साधारणता में भी जीवन प्रसंग की असाधारणताओं को छुपाए हुए चलती हैं , उन असाधारणताओं की तलाश करते हुए ही जीवन की कई अनछुई कहानियों से हम परिचित होते हैं । 


■सारा रॉय की कहानी परिणय और मन में उठते कुछ सवाल 

हंस अगस्त 2019 अंक में अरसे बाद सारा रॉय की कहानी  "परिणय" पढ़ने का सुयोग हुआ था। सारा रॉय की कहानी परिणय पढ़कर एकबारगी ऐसा महसूस हुआ कि कहानी में ऐसा कुछ भी खास नहीं है पर बहुत सोचने विचारने के बाद कहानी की गहराई में जाकर उतरना सम्भव हो सका । इस कहानी में एक घर में 3 जोड़ा पति पत्नियों की बातचीत भर है जिसमें एक जोड़ा पति पत्नी लेखक -लेखिका का भी है । मेजबान पति-पत्नी जिनके बेटे के परिणय को लेकर मिस्टर एंड मिसेस त्रिपाठी बेटी का रिश्ता लेकर आए हुए हैं । ये मेजबान पति पत्नी विदेशी ब्रांडेड चीजों और भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रदर्शन को लेकर बहुत अधिक सचेत हैं और उनकी नजर में जैसे यही चीजें ही आदमी के जीवन में बड़ा रोल अदा करती हैं।लेखक लेखिका दंपत्ति एक तरह से बिन बुलाए पड़ोसी की तरह वहां मौजूद हैं ।  लेखक जो कि इस संभ्रांत दम्पति का पड़ोसी भी है उसके खाने पीने की चीजों पर टूट पड़ने की दरिद्रता पूर्ण लापरवाही के कारण लेखिका पत्नी संकोच और लज्जा का बराबर अनुभव किए जा रही है फिर भी लेखक महोदय पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है  । मेजबान दंपत्ति अपने होने वाले समधी-समधीयान मिस्टर एन्ड मिसेज त्रिपाठी से उनका परिचय महान लेखक-लेखिका के बतौर इस तरह कराते हैं कि लेखिका को थोड़ा संकोच भी होता है । कहानी आगे बढ़ती है और फिर रिमोट से चलने वाले मखमली रेशमी विदेशी परदों  इत्यादि ब्रांडेड वस्तुओं के प्रदर्शन पर फोकस हो जाती है ।परिचय से उपजी लेखक-लेखिका होने की महत्ता जैसी औपचारिक चीजें कहीं पीछे छूट जाती हैं । अंत में अपने घर को लौट कर  लेखिका जिस तरह अपनी दीन हीन अवस्था को महसूस करती है वही कहानी का केंद्रीय बिषय है । कहानी सच्चाई से रूबरू कराती है । ऐसी कहानियां अनुभव से उपजती हैं और आज के समय में वास्तविकता को सामने रखती हैं । देखा जाए तो कहानी में कुछ भी नहीं है पर इस कुछ भी नहीं के पीछे अगर झांककर देखें तो कहानी में वह सब कुछ है जिसे हम देख कर भी देख नहीं पाते या देखना नहीं चाहते ।


■विनीता परमार की कहानी :  तलछट की बेटियां

परिकथा के अंक नवम्बर दिसम्बर 2021 में विनीता परमार की एक कहानी "तलछट की बेटियां" प्रकाशित हुई थी। विनीता परमार  साइंस बिषय के स्टूडेंट रहे हैं इसलिए उनके नजरिए में , उनकी कहानियों में विज्ञान, उससे जुड़ी समस्याएं और समाज विमर्श का एक सार्थक मेलजोल छनकर सामने आता है। वैज्ञानिक नजरिया और समाज विमर्श का सार्थक मेलजोल इस नई कहानी में भी हम देख पाते हैं।कई ग्रामीण क्षेत्रों में पानी में आर्सेनिक जैसे जहरीले रासायनिक तत्व का पाया जाना समाचारों में  अपनी सुर्खियां बटोरता रहा है।पानी जैसे जरूरी तत्व जिसके बिना हमारा जीवन चल नहीं सकता, उसमें  इस जहरीले पदार्थ के पाए जाने  की कई विभीषिकाएँ और उसके दुष्प्रभाव ,  मानवीय जीवन को प्रभावित करते आ रहे हैं। कहानी तलछट की बेटियां में उसके दुष्प्रभावों की एक पड़ताल की गई है । पानी में घुले आर्सेनिक बाहुल्य क्षेत्र में  बहुत कम उम्र के युवक युवतियों के सिर के बाल कैसे पक जाते हैं और उसके चलते मन में किस तरह एक मानसिक उथल-पुथल उत्पन्न होती है इसे विनीता ने इस कहानी के माध्यम से बखूबी प्रस्तुत किया है। पके बालों के साथ किशोर वय के लड़के और लड़कियां अपनी सुंदरता खो देते हैं , उनके प्रति समाज की धारणा इस तरह निर्मित होने लगती है कि वे बहुत बीमार किस्म के युवक और युवतियां हैं ।यह गलत धारणा केवल सुंदरता तक ही सीमित नहीं रहती है बल्कि यह बहुत आगे तक जाती है।लोग यह भी सोचने लगते हैं कि आर्सेनिक जैसे तत्व ने उनके शरीर को इस कदर छिन्न-भिन्न कर दिया है कि कोई लड़की अगर आगे चलकर मां बनेगी भी तो उससे जन्म लेने वाला बच्चा बीमार ही पैदा होगा। यह गलत किस्म की धारणा एक भयावह किस्म की धारणा है जो घर बसाने को बनने वाले नए रिश्तों की राह में एक बड़ी रुकावट बनती है। इस रुकावट से उपजी पीड़ा का एक मार्मिक चित्रण इस कहानी में मिलता है और कहानी विज्ञान की समस्या को लांघ कर एक सामाजिक समस्या को छूने लगती है। विज्ञान और समाज विमर्श के नजरिए से देखें तो यह कहानी एक सार्थक कहानी प्रतीत होती है। इस कहानी में यह संदेश भी छुपा है कि समाज की धारणाएं कई बार कितनी अवैज्ञानिक होती हैं। विज्ञान की समस्या को अगर वैज्ञानिक नजरिए से नहीं देखा जाएगा, वैज्ञानिक तरीके से नहीं परखा जाएगा तो उसके परिणाम बहुत कष्टकर होंगे। इस कष्ट को इस कहानी की कथा नायिका के जीवन के माध्यम से महसूस कराने की सार्थक कोशिश विनीता ने की है। 

देखा जाए तो कहानी जीवन के हर क्षेत्र में है, बस उसे तलाशने की जरूरत है। विनीता जी ने जीवन में विज्ञान और समाज विमर्श दोनों को साधकर 'तलछट की बेटियां' जैसी कहानी की रचना की है। मनुष्य जीवन में नए किस्म की कहानियों को तलाशने का यह उद्यम सार्थक है। भाषिक संवेदना और लालित्य के स्तर पर भी यह कहानी अपनी पठनीयता को अंत तक बनाए रखती है।

रमेश शर्मा



टिप्पणियाँ

इन्हें भी पढ़ते चलें...

परदेशी राम वर्मा की कहानी दोगला

परदेशी राम वर्मा की कहानी दोगला वागर्थ के फरवरी 2024 अंक में है। कहानी विभिन्न स्तरों पर जाति धर्म सम्प्रदाय जैसे ज्वलन्त मुद्दों को लेकर सामने आती है।  पालतू कुत्ते झब्बू के बहाने एक नास्टेल्जिक आदमी के भीतर सामाजिक रूढ़ियों की जड़ता और दम्भ उफान पर होते हैं,उसका चित्रण जिस तरह कहानी में आता है वह ध्यान खींचता है। दरअसल मनुष्य के इसी दम्भ और अहंकार को उदघाटित करने की ओर यह कहानी गतिमान होती हुई प्रतीत होती है। पालतू पेट्स झब्बू और पुत्र सोनू के जीवन में घटित प्रेम और शारीरिक जरूरतों से जुड़ी घटनाओं की तुलना के बहाने कहानी एक बड़े सामाजिक विमर्श की ओर आगे बढ़ती है। पेट्स झब्बू के जीवन से जुड़ी घटनाओं के उपरांत जब अपने पुत्र सोनू के जीवन से जुड़े प्रेम प्रसंग की घटना उसकी आँखों के सामने घटित होते हैं तब उसके भीतर की सामाजिक जड़ता एवं दम्भ भरभरा कर बिखर जाते हैं। जाति, समाज, धर्म जैसे मुद्दे आदमी को झूठे दम्भ से जकड़े रहते हैं। इनकी बंधी बंधाई दीवारों को जो लांघता है वह समाज की नज़र में दोगला होने लगता है। जाति धर्म की रूढ़ियों में जकड़ा समाज मनुष्य को दम्भी और अहंकारी भी बनाता है। कहानी इन दीवा...

केलो नदी : गांधीवादी मॉडल की अनदेखी और विकास के दुष्चक्र में फंसी नदियाँ

केलो नदी की समस्या को लेकर अनुग्रह में एक आलेख प्रकाशित हुआ था "रायगढ़ की जीवन रेखा केलो का शोक गीत" । उस आलेख को लेकर हमें कुछ महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। लेखक और विचारक डॉ हेमचंद्र पांडे और युवा कवि लेखक बसंत राघव की इन प्रतिक्रियाओं से सम्भव है इस बहस को आगे और जगह मिले । इन दोनों ही प्रतिक्रियाओं को अनुग्रह के पाठकों के लिए हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं - ◆१◆ अनुग्रह के 06/04/2023 के अंक में रमेश जी के द्वारा लिखित रायगढ़ की जीवन रेखा 'केलो' का शोक गीत हम रायगढ़ वासियों के द्वारा अनसुना ही रह गया । बसंत राघव के अलावा  किसी ने भी अत्यंत ज्वलंत समस्या पर केंद्रित इस जरूरी आलेख पर कोई टिप्पणी नहीं की। डॉ. हेमचन्द्र पांडेय  यह मौन और उदासीनता ही वे कारण हैं कि रायगढ़ मानों आत्मघात की दहलीज पर जा पहुंचा है। रमेश जी के इस आलेख का प्रत्यक्ष संदर्भ स्थानीय जरूर है पर, निहितार्थ सार्वभौमिक है। केलो के स्थान पर विश्व की किसी भी नदी का नाम रखा जा सकता है और रायगढ़ के स्थान पर किसी भी अन्य धुंधियाये औद्योगिक नगर या महानगर का नाम डाला जा सकता है ; तब भी आलेख का वर्...

'सुबह सवेरे' न्यूज मेगेज़ीन भोपाल एवं इंदौर एडिशन में प्रकाशित कहानी: 'उम्मीद' ■रमेश शर्मा

■कहानी : उम्मीद  मनुष्य के जीवन में इतने प्रश्न हैं कि धरती इन प्रश्नों का भार उठाते हुए अपने एकांत में कराहती भी होगी । धरती का कराहना हम सुन नहीं पाते अन्यथा हम सुनकर चकित होते । संभव है करूणा से भर उठते । चारों तरफ प्रश्नों का एक झुण्ड है। घर के बाहर प्रश्न ,घर के भीतर प्रश्न। सोते-जागते हर समय प्रश्न ही प्रश्न । हालात ऐसे हो चुके कि कहीं टहलने निकलो तो भी प्रश्न पीछे दौड़ते चले आते हैं । लगता है जैसे उन्हें भी घर से बाहर निकल कर घूमना पसंद हो।  इस घटना को घटित हुए बहुत दिन नहीं हुए जब मिश्रा जी अपने डॉगी टोक्यो को साथ लेकर कालोनी की सूनी सडकों पर टहलने निकले थे । उस दिन उनके सामने मोहल्ले की एक लड़की बतियाते हुए अपनी ही रौ में बेसुध चली जा रही थी । उसकी बातचीत के दरमियान आवाज़ की तीव्रता कुछ इस कदर तेज थी कि सुनकर उन्हें याद आया....., एक प्रश्न दिमाग में उठने लगा .... इसका नाम कहीं भुलेनी तो नहीं? यह सोचकर ही मिश्रा जी के दिमाग में एक और प्रश्न घूमने लगा कि उन्हें आखिर कब और कैसे पता चला कि उसका नाम भुलेनी है? उन्होंने दिमाग में बहुत जोर डाला पर ऎसी कोई जानकारी चलकर उनके पास ...

समकालीन कहानी : अनिल प्रभा कुमार की दो कहानियाँ- परदेस के पड़ोसी, इंद्रधनुष का गुम रंग ,सर्वेश सिंह की कहानी रौशनियों के प्रेत आदित्य अभिनव की कहानी "छिमा माई छिमा"

■ अनिल प्रभा कुमार की दो कहानियाँ- परदेस के पड़ोसी, इंद्रधनुष का गुम रंग अनिलप्रभा कुमार की दो कहानियों को पढ़ने का अवसर मिला।परदेश के पड़ोसी (विभोम स्वर नवम्बर दिसम्बर 2020) और इन्द्र धनुष का गुम रंग ( हंस फरवरी 2021)।।दोनों ही कहानियाँ विदेशी पृष्ठ भूमि पर लिखी गयी कहानियाँ हैं पर दोनों में समानता यह है कि ये मानवीय संवेदनाओं के महीन रेशों से बुनी गयी ऎसी कहानियाँ हैं जिसे पढ़ते हुए भीतर से मन भींगने लगता है । हमारे मन में बहुत से पूर्वाग्रह इस तरह बसा दिए गए होते हैं कि हम कई बार मनुष्य के  रंग, जाति या धर्म को लेकर ऎसी धारणा बना लेते हैं जो मानवीय रिश्तों के स्थापन में बड़ी बाधा बन कर उभरती है । जब धारणाएं टूटती हैं तो मन में बसे पूर्वाग्रह भी टूटते हैं पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इन्द्र धनुष का गुम रंग एक ऎसी ही कहानी है जो अमेरिका जैसे विकसित देश में अश्वेतों को लेकर फैले दुष्प्रचार के भ्रम को तोडती है।अजय और अमिता जैसे भारतीय दंपत्ति जो नौकरी के सिलसिले में अमेरिका की अश्वेत बस्ती में रह रहे हैं, उनके जीवन अनुभवों के माध्यम से अश्वेतों के प्रति फैली गलत धारणाओं को यह कहान...

गजेंद्र रावत की कहानी : उड़न छू

गजेंद्र रावत की कहानी उड़न छू कोरोना काल के उस दहशतजदा माहौल को फिर से आंखों के सामने खींच लाती है जिसे अमूमन हम सभी अपने जीवन में घटित होते देखना नहीं चाहते। अम्मा-रुक्की का जीवन जिसमें एक दंपत्ति के सर्वहारा जीवन के बिंदास लम्हों के साथ साथ एक दहशतजदा संघर्ष भी है वह इस कहानी में दिखाई देता है। कोरोना काल में आम लोगों की पुलिस से लुका छिपी इसलिए भर नहीं होती थी कि वह मार पीट करती थी, बल्कि इसलिए भी होती थी कि वह जेब पर डाका डालने पर भी ऊतारू हो जाती थी। श्रमिक वर्ग में एक तो काम के अभाव में पैसों की तंगी , ऊपर से कहीं मेहनत से दो पैसे किसी तरह मिल जाएं तो रास्ते में पुलिस से उन पैसों को बचाकर घर तक ले आना कोरोना काल की एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी। उस चुनौती को अम्मा ने कैसे स्वीकारा, कैसे जूतों में छिपाकर दो हजार रुपये का नोट उसका बच गया , कैसे मौका देखकर वह उड़न छू होकर घर पहुँच गया, सारी कथाएं यहां समाहित हैं।कहानी में एक लय भी है और पठनीयता भी।कहानी का अंत मन में बहुत उहापोह और कौतूहल पैदा करता है। बहरहाल पूरी कहानी का आनंद तो कहानी को पढ़कर ही लिया जा सकता है।       ...

चक्रधर नगर स्कूल में जननायक रामकुमार जन्म शताब्दी वर्ष पर हुए शैक्षिक प्रतियोगिताओं के आयोजन

चक्रधर नगर स्कूल में जननायक रामकुमार जन्म शताब्दी वर्ष पर हुए शैक्षिक प्रतियोगिताओं के आयोजन ।  विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चे हुए पुरस्कृत रायगढ़। 16 दिसम्बर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व विधायक रामकुमार की स्मृति में उनके जन्म शताब्दी वर्ष पर शहर के अनेक संस्थानों में आयोजन हो रहे हैं। इसी कड़ी में जन्म शताब्दी आयोजन समिति के सहयोग से स्वामी आत्मानन्द शासकीय उ मा वि चक्रधरनगर में भी बच्चों के लिए स्लोगन,निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इन प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को पुरस्कृत करने के लिए सोमवार 16 दिसम्बर को स्कूल में एक गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ ।  मुख्य अतिथि नगर निगम पार्षद पंकज कंकरवाल, विशिष्ट अतिथि नगर निगम पार्षद कौशलेश मिश्र , वरिष्ठ रंगकर्मी अनुपम पाल एवं पूर्व विधायक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामकुमार के परिवार से सुनील कुमार अग्रवाल की उपस्थिति में बच्चों ने अपनी स्पीच कला का बखूबी प्रदर्शन किया। स्लोगन प्रतियोगिता अंतर्गत कनिष्ठ वर्ग में शगुफ्ताह  प्रथम,नन्दिता मेहर द्वितीय एवं रितिका पाऊले तृतीय स्थान पर रहीं।क्षमा देवांगन को ...

परिधि शर्मा की कहानी : मनीराम की किस्सागोई

युवा पीढ़ी की कुछेक   नई कथा लेखिकाओं की कहानियाँ हमारा ध्यान खींचती रही हैं । उन कथा लेखिकाओं में एक नाम परिधि शर्मा का भी है।वे कम लिखती हैं पर अच्छा लिखती हैं। उनकी एक कहानी "मनीराम की किस्सागोई" हाल ही में परिकथा के नए अंक सितंबर-दिसम्बर 2024 में प्रकाशित हुई है । यह कहानी संवेदना से संपृक्त कहानी है जो वर्तमान संदर्भों में राजनीतिक, सामाजिक एवं मनुष्य जीवन की भीतरी तहों में जाकर हस्तक्षेप करती हुई भी नज़र आती है। कहानी की डिटेलिंग इन संदर्भों को एक रोचक अंदाज में व्यक्त करती हुई आगे बढ़ती है। पठनीयता के लिहाज से भी यह कहानी पाठकों को अपने साथ बनाये रखने में कामयाब नज़र आती है। ■ कहानी : मनीराम की किस्सागोई    -परिधि शर्मा  मनीराम की किस्सागोई बड़ी अच्छी। जब वह बोलने लगता तब गांव के चौराहे या किसी चबूतरे पर छोटी मोटी महफ़िल जम जाती। लोग अचंभित हो कर सोचने लगते कि इतनी कहानियां वह लाता कहां से होगा। दरअसल उसे बचपन में एक विचित्र बूढ़ा व्यक्ति मिला था जिसके पास कहानियों का भंडार था। उस बूढ़े ने उसे फिजूल सी लगने वाली एक बात सिखाई थी कि यदि वर्तमान में हो रही समस्याओं क...

रायगढ़ की पर्वतारोही याशी जैन को मुम्बई की संस्था “पीपुल्स आर्ट सेन्टर ” द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज अचीवमेंट अवार्ड दिया गया

  मुंबई ।   रायगढ शहर की होनहार बेटी ख्यातिप्राप्त पर्वतारोही याशी जैन को मुम्बई की संस्था “पीपुल्स आर्ट सेन्टर ” द्वारा  छत्रपति शिवाजी महाराज अचीवमेंट अवॉर्ड  से   नवाजा गया है ।  अवार्ड ग्रहण करती याशी जैन पिछले दिनो मुम्बई के पाश एरिया में स्थित हीरानन्दानी ग्रुप के फाईव स्टार होटल  मेलूहा फर्न  मे एक रंगारंग कार्यक्रम मे कई मराठी दिग्गजो के साथ याशी को उक्त अवार्ड से नवाजा गया। यह सम्मान मुम्बई उत्तर से सांसद  गोपाल शेट्टी और मुम्बई के रिटायर्ड जज  डॉक्टर प्रकाश कुमार टी राहुले के हाथों प्रदान किया गया। उक्त कार्यक्रम में यह अवार्ड पाने वालो में मराठी सिनेमा के जाने माने एक्टर श्री सुबोध भावे , मुम्बई के रिटायर्ट पुलिस अधिकारी श्री सुरेश वाली शेट्टी , कई जाने पहचाने डाक्टर्स , नृत्य व कला क्षेत्र के कई दिग्गज कलाकार भी  शामिल थे।  इस कार्यक्रम के आयोजक गोपकुमार पिल्लई ने बताया कि छत्रपती शिवाजी महाराज की जन्म जयंती पर हर वर्ष यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है और देश के हर क्षेत्र से दिग्गजों का चयन ह...

अच्युतानंद मिश्र युवा कवि आलोचक का वक्तब्य: छत्तीसगढ़ साहित्य एकेडमी का आयोजन

प्र भात त्रिपाठी का उपन्यास "किस्सा बेसिर पैर" वस्तुकृत हो रहे मनुष्य के भीतर गैर वस्तुकृत चेतना और प्रेम को स्थापित करता है- युवा कवि आलोचक अच्युतानंद मिश्र     अच्युतानंद मिश्र  प्रभात त्रिपाठी की आलोचना और उनके रचनात्मक लेखन को केंद्र में रखकर मेरे जेहन में एक प्रश्न है और जहां से मैं अपनी बात शुरू करने जा रहा हूँ ।  हम सरलीकरण के लिए दो कोटि लेखकों की बनाएं ... एक वो जो किसी ख़ास विधा में पूरे जीवन लिखते हैं और एक उस तरह के लेखक जो विधाओं के बीच आवाजाही करते हैं ।  वे लेखक जो विधाओं के बीच आवाजाही करते हैं मसलन प्रभात त्रिपाठी जो आलोचना भी लिखते हैं , कविता भी लिखते हैं, कहानी और उपन्यास भी लिखते हैं । यह विधाओं के अतिक्रमण का जो मामला है उसमें इस बीच क्या लेखक की कोई केन्द्रीय प्रवृत्ति मौजूद रहती है जो उसकी आलोचना में भी हो, उसके रचनात्मक लेखन  में भी हो ? क्या इस तरह की किसी केन्द्रीयता की खोज कोई अर्थ रखती है? या वहां से उस लेखक को जानने समझने में कोई मदद मिल सकती है ?  फर्ज कीजिए कि इस सवाल को मैं इसलिए भी उठा रहा हूँ कि हमारे सामने इस तरह के ...

रायगढ़ जिले के विभिन्न आयोजनों में शामिल होंगे वित्त मंत्री ओम प्रकाश चौधरी। महापल्ली में उनके हाथों स्व.हेमसुंदर गुप्त की मूर्ति का होगा अनावरण

रायगढ़ । रायगढ़ विधायक एवम  सूबे के वित्त मंत्री ओपी चौधरी गुरुवार 7 मार्च 2024 को रायगढ़ जिले के विभिन्न आयोजनों में शामिल होंगे। निर्धारित दौरे के मुताबिक इन आयोजनों में शामिल होने के लिए वे प्रातः 8 बजे रायपुर से सड़क मार्ग द्वारा कार से रवाना होकर 12 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण करने के लिए पुसौर पहुंचेंगे।आयोजन उपरांत पुसौर से रायगढ़ के लिए वे रवाना हो जाएंगे और एक बजे रायगढ़ मिनी स्टेडियम में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना कार्यक्रम में शामिल होंगे।रायगढ़ में ही अपरान्ह 1.30 बजे डिग्री कॉलेज रायगढ़ के वार्षिकोत्सव आयोजन में वे शामिल होकर विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाएंगे। रायगढ़ से ग्राम जुरडा के लिए वे फिर रवाना हो जाएंगे और अपरान्ह 3 बजे ग्राम जुरडा में आयोजित जिला स्तरीय पशु मेला कार्यक्रम में शामिल होंगे और ग्रामीणों से संवाद भी करेंगे। कल के उनके व्यस्त कार्यक्रम में जो अंतिम कार्यक्रम है वह महापल्ली ग्राम में सम्पन्न होगा जहां वे  स्वर्गीय हेमसुंदर गुप्त की मूर्ति का अनावरण करेंगे और साथ ही सभा को संबोधित करेंगे। महापल्ली के इस आयोजन में उनके साथ पूर्व विध...