सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

माँ पर महत्वपूर्ण कोटेशन : माँ के बिना ये खूबसूरत शब्द हम तक न पहुँचते

 

आज मदर्स डे है । माँ को लेकर न जाने कितनी गंभीर और खूबसूरत बातें बड़े बड़े लोगों ने कही हैं। अव्वल तो ये कि ये सारे बड़े लोग किसी माँ की संतानें ही हैं जिसने अपनी संवेदना के शब्दों से उन्हें इतना तरल बनाया कि वे माँ से जुड़े अपने अनुभवों को दुनिया से साझा कर सके । माँ न होती ये खूबसूरत शब्द हम तक कभी न पहुँचते ।आईये हम भी उनके अनुभवों को जाने समझें कि माँ को लेकर किसने क्या कहा है -

 

मातृत्व दिवस की बधाई 

 

मां कहती थी चीजें जहां होती हैं

अपनी एक जगह बना लेती हैं

और वह आसानी से मिटती नहीं

मां अब नहीं है

सिर्फ उसकी जगह बची हुई है !

- मंगलेश डबराल

 

माँ का दिल बच्चे के स्कूल का कमरा है।

-Henry Ward Beecher  

 

जब आप अपनी माँ की आँखों में देखते हैं, तो आपको पता चलता है कि यह इस धरती पर मिलने वाला सबसे शुद्ध प्रेम है।

-Mitch Albom

 

भगवान हर जगह नहीं हो सकता है, इसलिए उसने माँ को बनाया।

-Rudyard Kipling

 

मैं आज जो कुछ भी हूँ, जो कुछ भी होऊंगा, इसके लिए मैं मेरी प्यारी माँ का अहसानमंद हूँ।

-Abraham Lincoln

 

 

यदि पहली बार में आप सफल नहीं होते हैं, तो इसे उस तरह से करने का प्रयास करें जिस तरह से माँ ने आपको शुरुआत में बताया था।

जवानी फीकी पड़ जाती है; प्यार मुरझा जाता है; दोस्ती की पत्तियाँ झड़ जाती हैं; पर एक माँ की छुपी हुई आशा उन सभी के पार होती है।

-Oliver Wendell Holmes

 

 

 

कभी-कभी मातृत्व की ताकत, इस  प्रकृति के कानूनों से अधिक होती है।

 

-Barbara Kingsolver

 

एक माँ वो भी समझती है जो बच्चा कहता नहीं है।

-Jewish proverb

 

छोटे बच्चों के होठों और दिलों में भगवान का नाम “माँ” होता है।

-William Makepeace Thackery

 

माँ का प्यार वह ईंधन है, जो एक सामान्य इंसान को असंभव काम करने में सक्षम बनाता है।

-Marion C. Garretty

 

एक माँ की बाहें किसी और की तुलना में सबसे अधिक आरामदायक होती हैं।

-Diana, Princess of Wales

 

सभी प्यार मातृत्व से शुरू होकर वहीं समाप्त होते हैं।
Motherhood: All love begins there.

-Robert Browning

 

 

मां का प्यार शांति है। इसे अधिग्रहण की जरूरत नहीं है, इसे लायक होने की भी जरूरत नहीं है।

 

-एरिच फोर्म्म

 

शुद्ध सोने को तो चमका सकते हैं, पर कौन अपनी मां को और ज्यादा सुन्दर बना सकता है? 

-महात्मा गांधी

 

 

किस मूल्य से हम मातृत्व की महिमा का भुगतान कर सकते हैं? 

-इसाडोरा डंकन

 

 

जब एक बच्चे का जन्म होता है तो एक मां का भी दुबारा जन्म होता है। 

-गिल्बर्ट पार्कर

 

 

मां के द्वारा गाये जाने वाले गीतों से बढ़कर दूसरी कोई अच्छी कला इस दुनिया   में नहीं है। 

-बिली सन्डे

 

 

अगर विकास वास्तव में काम करता है, तो कैसे माताओं के केवल दो हाथ होते हैं? 

-मिल्टन बर्ले

 

 

मातृत्व मुश्किल होने के साथ-साथ इनाम देने के योग्य भी है। 

 

-ग्लोरिया इस्टेफेन

 

 

 

 

 

मुझे अपनी मां की प्रार्थनाएं याद हैं, उन प्रार्थनाओं ने हमेशा मेरा साथ दिया। वे पूरी जिंदगीभर मुझसे जुड़ी रहीं। 

-अब्राहम लिंकन

 

 

 

एक मां की गोद कोमलता से बनी रहती है और बच्चे उसमें आराम से सोते हैं। 

- विक्टर ह्यूगो

 

मेरी माँ मेरी सबसे बड़ी अध्यापक थी, करुणा, प्रेम, निर्भयता की एक शिक्षक। अगर प्यार एक फूल के जितना मीठा है, तो मेरी माँ प्यार का एक मीठा फूल है।

-स्टीव वंडर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

टिप्पणियाँ


  1. विद्वानों के विचारों को पढ़ कर अच्छा लगा
    धन्यवाद सर🙏🏻😊
    आप भी हमारे लिये एक अच्छी किताब की तरह हैं
    हमेशा नई चीजें ,जानकारियां सीखने को मिलती हैं

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इन्हें भी पढ़ते चलें...

“मेरे सपनों का भारत” में महिला सशक्तिकरण और समानता का संदेश, संचिता गुप्ता ने दी प्रभावशाली प्रस्तुति

“मेरे सपनों का भारत” में महिला सशक्तिकरण और समानता का संदेश, संचिता गुप्ता ने दी प्रभावशाली प्रस्तुति रायगढ़, 1 अक्टूबर 2026। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामगांव, रायगढ़ की कक्षा 12वीं बायो समूह की होनहार एवं प्रतिभावान छात्रा कु. संचिता गुप्ता ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित विकासखंड स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में सहभागिता करते हुए अपने प्रभावशाली वक्तव्य से सभी का ध्यान आकर्षित किया। नटवर स्कूल, रायगढ़ में आयोजित इस प्रतियोगिता में संचिता गुप्ता ने “मेरे सपनों का भारत” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने अपने भाषण में विकसित, शिक्षित, आत्मनिर्भर और समतामूलक भारत की परिकल्पना रखते हुए शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, रोजगार, सामाजिक समरसता तथा नागरिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए। अपने वक्तव्य में संचिता ने भेदभाव रहित समाज में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान अधिकार को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनके सपनों का भारत ऐसा भारत है, जहां महिलाओं को किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े, उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण मिले ...

■जामगांव में संकुल स्तरीय क्विज प्रतियोगिता का आयोजन ■विज्ञान, तकनीक एवं सामान्य अध्ययन के प्रश्नों में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह; विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होगी संयुक्त टीम

■जामगांव में संकुल स्तरीय क्विज प्रतियोगिता का आयोजन ■विज्ञान, तकनीक एवं सामान्य अध्ययन के प्रश्नों में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह; विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होगी संयुक्त टीम जामगांव, रायगढ़। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामगांव में संकुल स्तरीय क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में संकुल प्राचार्य, संकुल अकादमिक समन्वयक (CAC) तथा संकुल के शिक्षक उपस्थित रहे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान-विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने, तार्किक क्षमता बढ़ाने तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करना था। शामिल स्कूल - प्रतियोगिता में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोयलंगा, जामगांव, कुकुर्दा, छुहीपाली एवं नावापारा के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रश्नोत्तरी में विज्ञान, तकनीक एवं सामान्य अध्ययन से संबंधित प्रश्न शामिल किए गए। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी ज्ञान क्षमता, तत्परता और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। हायर सेकेंडरी स्कूल स्तर पर हुई प्रतियोगिता इसी क्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामगांव के हायर सेके...

'कोरोना की डायरी' का विमोचन

"समय और जीवन के गहरे अनुभवों का जीवंत दस्तावेजीकरण हैं ये विविध रचनाएं"    छत्तीसगढ़ मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन जिला इकाई रायगढ़ के अध्यक्ष सुशीला साहू के सम्पादन में प्रकाशित किताब 'कोरोना की डायरी' में 52 लेखक लेखिकाओं के डायरी अंश संग्रहित हैं | इन डायरी अंशों को पढ़ते हुए हमारी आँखों के सामने 2020 और 2021 के वे सारे भयावह दृश्य आने लगते हैं जिनमें किसी न किसी रूप में हम सब की हिस्सेदारी रही है | किताब के सम्पादक सुश्री सुशीला साहू जो स्वयं कोरोना से पीड़ित रहीं और एक बहुत कठिन समय से उनका बावस्ता हुआ ,उन्होंने बड़ी शिद्दत से अपने अनुभवों को शब्दों का रूप देते हुए इस किताब के माध्यम से साझा किया है | सम्पादकीय में उनके संघर्ष की प्रतिबद्धता  बड़ी साफगोई से अभिव्यक्त हुई है | सुशीला साहू की इस अभिव्यक्ति के माध्यम से हम इस बात से रूबरू होते हैं कि किस तरह इस किताब को प्रकाशित करने की दिशा में उन्होंने अपने साथी रचनाकारों को प्रेरित किया और किस तरह सबने उनका उदारता पूर्वक सहयोग भी किया | कठिन समय की विभीषिकाओं से मिलजुल कर ही लड़ा जा सकता है और समूचे संघर्ष को लिखि...

सीमा शर्मा की कहानी चिलगोजे का तेल

  हाल के वर्षों में युवा कथा लेखिका सीमा शर्मा की कई कहानियों ने जिस तरह पाठकों से संवाद किया है , कथा जगत में एक आशा जगाने वाली घटना के बतौर उसे देखा जाने लगा है ।   यह बात उस संदर्भ में कही जा रही है कि सीमा की कहानियों का जो कंटेंट है वह थोड़ा अलहदा है । अलहदा इस सन्दर्भ में कि समाज में अलक्षित रह जाने वाली घटनाओं पर लेखिका की पैनी नजर गयी है और अपने आस पड़ोस की अनुभवजनित घटनाओं को उन्होंने कहानी में शिल्प और भाषायी स्तर पर एक नयी खूबसूरती प्रदान की है ।  चाहे उनकी कहानी  ' मैं रेजा और पच्चीस जून ' की बात करें , कहानी ' चरित्र प्रमाण ' की बात करें या यहाँ ली जा रही कहानी ' चिलगोजे का तेल ' की बात करें , इन सभी कहानियों में कथा रचना की एक नयी दृष्टि से पाठकों का परिचय होता है। अब तक सीमा की कहानियाँ कथादेश , परिकथा , इन्द्रप्रस्थ भारती , कथाक्रम , जनसत्ता , नया साहित्य निबंध सहित अन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर चर्चा पा चुकी हैं ।   उनकी कहानियां अपनी भाषा और कथ्य के साथ जिस तरह अपने समय से टकराती हैं , वह उन्हें पठनीय बनाती हैं।   कहानी में किसी महिला ले...

प्रीति प्रकाश की कहानी : राम को जन्म भूमि मिलनी चाहिए

प्रीति प्रकाश की कहानी 'राम को जन्म भूमि मिलनी चाहिए' को वर्ष 2019-20 का राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान मिला है, इसलिए जाहिर सी बात है कि इस कहानी को पाठक पढ़ना भी चाहते हैं | हमने उनकी लिखित अनुमति से इस कहानी को यहाँ रखा है | कहानी पढ़ते हुए आप महसूस करेंगे कि यह कहानी एक संवेदन हीन होते समाज के चरित्र के दोहरेपन, ढोंग और उसके एकतरफा नजरिये को  किस तरह परत दर परत उघाड़ती चली जाती है | समाज की आस्था वायवीय है, वह सच के राम जिसके दर्शन किसी भी बच्चे में हो सकते हैं  , जो साक्षात उनकी आँखों के सामने  दीन हीन अवस्था में पल रहा होता है , उसके प्रति समाज की न कोई आस्था है न कोई जिम्मेदारी है | "समाज की आस्था एकतरफा है और निरा वायवीय भी " यह कहानी इस तथ्य को जबरदस्त तरीके से सामने रखती है | आस्था में एक समग्रता होनी चाहिए कि हम सच के मूर्त राम जो हर बच्चे में मौजूद हैं , और अमूर्त राम जो हमारे ह्रदय में हैं , दोनों के प्रति एक ही नजरिया रखें  | दोनों ही राम को इस धरती पर उनकी जन्म भूमि  मिलनी चाहिए, पर समाज वायवीयता के पीछे जिस तरह भाग रहा है, उस भागम भाग से उपजी संवेदनही...

कौन हैं ओमा द अक और इनदिनों क्यों चर्चा में हैं।

आज अनुग्रह के पाठकों से हम ऐसे शख्स का परिचय कराने जा रहे हैं जो इन दिनों देश के बुद्धिजीवियों के बीच खासा चर्चे में हैं। आखिर उनकी चर्चा क्यों हो रही है इसको जानने के लिए इस आलेख को पढ़ा जाना जरूरी है। किताब: महंगी कविता, कीमत पच्चीस हजार रूपये  आध्यात्मिक विचारक ओमा द अक् का जन्म भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी में हुआ। महिलाओं सा चेहरा और महिलाओं जैसी आवाज के कारण इनको सुनते हुए या देखते हुए भ्रम होता है जबकि वे एक पुरुष संत हैं । ये शुरू से ही क्रान्तिकारी विचारधारा के रहे हैं । अपने बचपन से ही शास्त्रों और पुराणों का अध्ययन प्रारम्भ करने वाले ओमा द अक विज्ञान और ज्योतिष में भी गहन रुचि रखते हैं। इन्हें पारम्परिक शिक्षा पद्धति (स्कूली शिक्षा) में कभी भी रुचि नहीं रही ।  इन्होंने बी. ए. प्रथम वर्ष उत्तीर्ण करने के पश्चात ही पढ़ाई छोड़ दी किन्तु उनका पढ़ना-लिखना कभी नहीं छूटा। वे हज़ारों कविताएँ, सैकड़ों लेख, कुछ कहानियाँ और नाटक भी लिख चुके हैं। हिन्दी और उर्दू में  उनकी लिखी अनेक रचनाएँ  हैं जिनमें से कुछ एक देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुक...

रायगढ़ के राजाओं का शिकारगाह उर्फ रानी महल raigarh ke rajaon ka shikargah urf ranimahal.

  रायगढ़ के चक्रधरनगर से लेकर बोईरदादर तक का समूचा इलाका आज से पचहत्तर अस्सी साल पहले घने जंगलों वाला इलाका था । इन दोनों इलाकों के मध्य रजवाड़े के समय कई तालाब हुआ करते थे । अमरैयां , बाग़ बगीचों की प्राकृतिक संपदा से दूर दूर तक समूचा इलाका समृद्ध था । घने जंगलों की वजह से पशु पक्षी और जंगली जानवरों की अधिकता भी उन दिनों की एक ख़ास विशेषता थी ।  आज रानी महल के नाम से जाना जाने वाला जीर्ण-शीर्ण भवन, जिसकी चर्चा आगे मैं करने जा रहा हूँ , वर्तमान में वह शासकीय कृषि महाविद्यालय रायगढ़ के निकट श्रीकुंज से इंदिरा विहार की ओर जाने वाली सड़क के किनारे एक मोड़ पर मौजूद है । यह भवन वर्तमान में जहाँ पर स्थित है वह समूचा क्षेत्र अब कृषि विज्ञान अनुसन्धान केंद्र के अधीन है । उसके आसपास कृषि महाविद्यालय और उससे सम्बद्ध बालिका हॉस्टल तथा बालक हॉस्टल भी स्थित हैं । यह समूचा इलाका एकदम हरा भरा है क्योंकि यहाँ कृषि अनुसंधान केंद्र के माध्यम से लगभग सौ एकड़ में धान एवं अन्य फसलों की खेती होती है।यहां के पुराने वासिंदे बताते हैं कि रानी महल वाला यह इलाका सत्तर अस्सी साल पहले एकदम घनघोर जंगल हुआ करता था ...

कोइलिघुगर वॉटरफॉल तक की यात्रा रायगढ़ से

    अपने दूर पास की भौगौलिक तथा सांस्कृतिक परिस्थितियों को जानने समझने के लिए पर्यटन एक आसान रास्ता है । पर्यटन से दैनिक जीवन की एकरसता से जन्मी ऊब भी कुछ समय के लिए मिटने लगती है और हम कुछ हद तक तरोताजा भी महसूस करते हैं । यह ताजगी हमें भीतर से स्वस्थ भी करती है और हम तनाव से दूर होते हैं । रायगढ़ वासियों को पर्यटन करना हो वह भी रायगढ़ के आसपास तो झट से एक नाम याद आता है कोयलीघोघर! कोयलीघोघर ओड़िसा के झारसुगड़ा जिले का एक प्रसिद्द पिकनिक स्पॉट है जहां रायगढ़ से एक घंटे में सड़क मार्ग की यात्रा कर बहुत आसानी से पहुंचा जा सकता है । शोर्ट कट रास्ता अपनाते हुए रायगढ़ से लोइंग, बनोरा, बेलेरिया होते ओड़िसा के बासनपाली गाँव में आप प्रवेश करते हैं फिर वहां से निकल कर भीखमपाली के पूर्व पड़ने वाले एक चौक पर जाकर रायगढ़ झारसुगड़ा मुख्य सड़क को पकड लेते हैं। इस मुख्य सड़क पर चलते हुए भीखम पाली के बाद पचगांव नामक जगह आती है जहाँ खाने पीने की चीजें मिल जाती हैं।  यहाँ के लोकल बने पेड़े बहुत प्रसिद्द हैं जिसका स्वाद कुछ देर रूककर लिया जा सकता है । पचगांव से चलकर आधे घंटे बाद कुरेमाल का ढाबा पड़...

गंगाधर मेहेर : ओड़िया के लीजेंड कवि gangadhar meher : odiya ke legend kavi

हम हिन्दी में पढ़ने लिखने वाले ज्यादातर लोग हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं के कवियों, रचनाकारों को बहुत कम जानते हैं या यह कहूँ कि बिलकुल नहीं जानते तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी ।  इसका एहसास मुझे तब हुआ जब ओड़िसा राज्य के संबलपुर शहर में स्थित गंगाधर मेहेर विश्वविद्यालय में मुझे एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर वक्ता वहां जाकर बोलने का अवसर मिला ।  2 और 3  मार्च 2019 को आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठी में शामिल होने के बाद मुझे इस बात का एहसास हुआ कि जिस शख्श के नाम पर इस विश्वविद्यालय का नामकरण हुआ है वे ओड़िसा राज्य के ओड़िया भाषा के एक बहुत बड़े कवि हुए हैं और उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से  ओड़िसा राज्य को देश के नक़्शे में थोड़ा और उभारा है। वहां जाते ही इस कवि को जानने समझने की आतुरता मेरे भीतर बहुत सघन होने लगी।वहां जाकर यूनिवर्सिटी के अध्यापकों से , वहां के विद्यार्थियों से गंगाधर मेहेर जैसे बड़े कवि की कविताओं और उनके व्यक्तित्व के बारे में जानकारी जुटाना मेरे लिए बहुत जिज्ञासा और दिलचस्पी का बिषय रहा है। आज ओड़िया भाषा के इस लीजेंड कवि पर अपनी बात रखते हुए मुझे जो खु...

समकालीन कविता और युवा कवयित्री ममता जयंत की कविताएं

समकालीन कविता और युवा कवयित्री ममता जयंत की कविताएं दिल्ली निवासी ममता जयंत लंबे समय से कविताएं लिख रही हैं। उनकी कविताओं को पढ़ते हुए यह बात कही जा सकती है कि उनकी कविताओं में विचार अपनी जगह पहले बनाते हैं फिर कविता के लिए जरूरी विभिन्न कलाएं, जिनमें भाषा, बिम्ब और शिल्प शामिल हैं, धीरे-धीरे जगह तलाशती हुईं कविताओं के साथ जुड़ती जाती हैं। यह शायद इसलिए भी है कि वे पेशे से अध्यापिका हैं और बच्चों से रोज का उनका वैचारिक संवाद है। यह कहा जाए कि बच्चों की इस संगत में हर दिन जीवन के किसी न किसी कटु यथार्थ से वे टकराती हैं तो यह कोई अतिशयोक्ति भरा कथन नहीं है। जीवन के यथार्थ से यह टकराहट कई बार किसी कवि को भीतर से रूखा बनाकर भाषिक रूप में आक्रोशित भी कर सकता है । ममता जयंत की कविताओं में इस आक्रोश को जगह-जगह उभरते हुए महसूसा जा सकता है। यह बात ध्यातव्य है कि इस आक्रोश में एक तरलता और मुलायमियत है। इसमें कहीं हिंसा का भाव नहीं है बल्कि उद्दात्त मानवीय संवेदना के भाव की पीड़ा को यह आक्रोश सामने रखता है । नीचे कविता की कुछ पंक्तियों को देखिए, ये पंक्तियाँ उसी आक्रोश की संवाहक हैं - सोचना!  सो...